– बानगंगा नदी पर जल भरने के लिए निजी साधनों से रवाना हुए श्रद्धालु
– मंगलवार से कथा प्रारम्भ होकर 24 नवम्बर तक चलेगी। इसी कड़ी में 25 नवंबर को हवन एवं पूर्णाहुति है तों वहीं 26 नवंबर को प्रसाद बितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
द खबर टाइम्स / आर. के. बाबा
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर
शोहरतगढ़ विकास खंड के ग्राम पंचायत दहियाड़ में मंगलवार से 9 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसको लेकर दहियाड़ निवासी समाजसेवी हरिशंकर सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी कुसुम सिंह सहित सैंकड़ो श्रद्धांलुओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गयी।

कलश यात्रा निकलने से पूर्व विद्वान पंडितों द्वारा द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चन कराने के बाद गाँव के काली स्थान, दुर्गामंदिर व शिव मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों पर पहुंच कर वहाँ भी विधि-विधान से पूजन अर्चन आदि कराया गया। पूरे उत्साह और श्रद्धा से भरे वातावरण में दहियाड़ गाँव से निकली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे की धुन पर गाँव के रास्ते होते हुए दहियाड मोड, परसिया, शोहरतगढ़ के रास्ते झूमते-नाचते आगे बढ़े। यात्रा का मुख्य पड़ाव बानगंगा नदी घाट रहा, जहां से कलशों में पवित्र जल भरकर गाँव में कार्यक्रम स्थल पहुँचे। कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य बना दिया। कार्यक्रम आयोजक हरिशंकर सिंह ने बताया कि मंगलवार से कथा प्रारम्भ होकर 24 नवम्बर तक चलेगी। इसी कड़ी में 25 नवंबर को हवन एवं पूर्णाहुति है तों वहीं 26 नवंबर को प्रसाद बितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

इस दौरान व्यवस्थापक सन्दीप सिंह, प्रदीप सिंह, जेई राजकुमार सिंह, रामसूरत, कलावती, किरन सिंह, आंचल सिंह, दर्शीका यशिका सिंह सहित सैंकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे। विदित हो श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन एक पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य है, जिसमें विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया जाता है। इस आयोजन में कलश यात्रा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसमें महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भक्ति भाव में सराबोर होकर शोभायात्रा निकालती हैं।

कलश यात्रा श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ का प्रतीक है, जो पूरे आयोजन को शुभता प्रदान करती है। इसमें महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भक्ति भाव में सराबोर होकर लाल और पीले रंग के वस्त्रों में शोभायात्रा निकालती हैं। श्रीमद्भागवत पुराण एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है, जिसमें भगवान कृष्ण की लियाओं और उनके जीवन के बारे में बताया गया है। यह ग्रंथ 18 पुराणों में से एक है और सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।




























