राष्ट्र प्रेम से सराबोर रहा शोहरतगढ़ का विशाल हिन्दू सम्मेलन…

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  • पूरी वसुधा को अपना परिवार मानता है हिन्दू धर्म- अजीत
  • भारत धरा पर जन्म लेने के लिए भगवान भी रहते हैं लालायित- राम मिलन त्रिपाठी

द खबर टाइम्स/श्रवण पटवा
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर

बुद्धवार को शोहरतगढ़ कस्बे के के भारत माता चौक पर हिन्दू सम्मेलन समिति की ओर से विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन राष्ट्र प्रेम से सराबोर रहा, जिसमें संघ वक्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में हिन्दू धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति लोगों की भावनाएं और विचार व्यक्त किए। इस दौरान बतौर वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह विभाग प्रचारक अजीत जी ने जाति-पाति की करो विदाई हिन्दू-हिन्दू, भाई-भाई के स्लोगन के साथ हिन्दू एकता पर बल देते हुए कहा कि संघ यह प्रेरित करता हैं कि हिन्दू समाज को छोटे-बड़े का भेद-भाव मिटाकर सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। जब हम सभी एकजुट होंगे, तो हम अपने समाज को आगे बढ़ा सकते हैं और देश की प्रगति में योगदान कर सकते हैं। हिन्दू धर्म की यह विशेषता है कि वह पूरी वसुधा को अपना परिवार मानता है, जो हमें एकता और प्रेम का संदेश देता है। हमारी सभी जातीय तभी सुरक्षित हैं जब हिन्दू सुरक्षित हैं। यह एकता हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाने में मदद करेगी और हमें एक मजबूत समाज बनाने में सक्षम बनाएगी। आगे कहा कि सहभोज नहीं सहज़ भोज होना चाहिए, यह एकता और समरसता का संदेश देता है। हमें भारत माता का ही यशगान गाना चाहिए, क्योंकि इसी धरती माता ने हमको बड़ा किया है। यह एकता और प्रेम का संदेश देता है, जो हमें अपने देश और संस्कृति के प्रति गर्व महसूस कराता है।


बतौर वक्ता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ राष्ट्रीय स्वयं सेवक राम मिलन त्रिपाठी ने कहा कि भारत धरा पर जन्म लेने के लिए भगवान भी लालायित रहते हैं, इसलिए को भारत को देव भूमि कहा जाता है। यह भगवान राम, भगवान कृष्ण जैसे महान अवतारों की जन्मभूमि है। यह हमें अपने देश के प्रति गर्व और सम्मान महसूस कराता है, और हमें इसकी रक्षा और विकास के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही हिन्दू एकता पर बल देते हुए कहा कि अगर हिन्दू जगा होता तो भारत माता के टुकड़े दुकड़े नहीं होते, यह एक ऐतिहासिक सत्य है। भारत के विभाजन के समय, कुछ नेताओं की कुर्सी के लालच और राजनीतिक खेल के कारण भारत माता के दो टुकड़े हो गए। हमें अपने देश और समाज के प्रति जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पंडित राजेंद्र पाण्डेय ने सनातन धर्म एवं संघ के इतिहास पर बिस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सनातन धर्म और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) दोनों ही भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण पहलू हैं। राष्ट्रीय बालिका शिक्षा समिति की सह प्रान्त प्रमुख कविता तिवारी ने कहा कि बालक की पहली गुरु माता होती हैं और देश को आगे बढ़ाने में माता की भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि वे बच्चों के चरित्र निर्माण, संस्कारों, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति सोच की पहली शिक्षक होती हैं, जो भविष्य के अच्छे नागरिक तैयार करती हैं। माताएँ शिक्षा, व्यवसाय और हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी के साथ देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में सक्रिय योगदान देती हैं, जिससे एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।

लोक गायक अमर मणि दूबे एवं राजन पाण्डेय द्वारा गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। इसके साथ ही कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं ने भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं पुष्प अर्चन कर भव्य हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम की शुरुआत की। साथ मंचासीन रहे मुख्य वक्ताओं को बैज़ लगाकर व अंग वस्त्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया।

लोक गायक अमर मणि दूबे एवं राजन पाण्डेय द्वारा संयुक्त रुप से प्रस्तुत गीत- जिस हिन्दू का खून न खौले, खून नहीं वह पानी है… हिन्दी, हिन्दू हिंदुस्तान… सिंदूर तो केवल झांकी हैं, मेंहदी मिशन अभी बाकी है… आतंकवाद मिटाना हैं तो पाकिस्तान मिटाना होगा… जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा… अयोध्या में मंदिर बनवाने वाले आ गए… जो राम को लाये है… आदि देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति ने सभी श्रोताओं को अपने तरफ आकर्षित कर भाव विभोर कर दिया।

मंचाशीन पदाधिकारियों का परिचय नगर कार्यवाह अखिलेश ने कराया तो वहीं मंच का संचालन ऋषि वर्मा ने किया। इस दौरान संघ के जिला प्रचारक विशाल जी, हिन्दू परिषद के प्रदेश महामंत्री एवं कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह, चेयरमैन उमा अग्रवाल के परिजन पुष्पा देवी, बबिता कसौधन (पूर्व चेयरमैन) बाबा राम उजागिर तिवारी, आनंद कसौधन, विक्रम दिवाकर सिंह, सुरेंद्र पाल, रिक्की अग्रहरी, दुर्गा प्रसाद तिवारी, रामकुमार तिवारी, धर्मेंद्र अग्रहरी, सौरभ गुप्ता, शिव प्रसाद वर्मा (पूर्व चेयरमैन) घनश्याम गुप्ता, बबलू गौड़, वीरेंद्र गौड़, श्यामू जी, पंकज श्रीवास्तव, सुजीत अग्रहरि, राजकुमार मोदनवाल, राजू बाबा, नन्दलाल वर्मा आदि मौजूद रहे।

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