द खबर टाइम्स/श्रवण कुमार पटवा
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर
चिल्हिया बाजार में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ ज्ञान के तीसरे दिन बुधवार की शाम कथावाचक डॉ. इंद्रदेव महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए भक्ति और ज्ञान का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र करने से ही मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है और जो व्यक्ति इस कथा को आत्मसात कर लेता है, वह सांसारिक दुखों से भी मुक्ति पा लेता है।

कथावाचक ने आगे कहा कि जीवन में मान-सम्मान, पद और प्रतिष्ठा मिलने पर उसे ईश्वर की कृपा मानकर सद्कर्म करना चाहिए। किंतु यदि मनुष्य में अभिमान आ जाए तो वही उसके पतन का कारण बन जाता है। कथा के दौरान उन्होंने राजा परीक्षित और शमीक ऋषि का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अहंकारवश राजा परीक्षित ने साधना में लीन ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें एक सप्ताह में मृत्यु का श्राप मिला। जब उन्होंने अपना स्वर्ण मुकुट त्याग दिया तो कलियुग का प्रभाव समाप्त हुआ और उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि जब-जब भगवान के भक्तों पर संकट आता है, तब भगवान उनके कल्याण के लिए स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं। राजा परीक्षित को मोक्ष दिलाने हेतु भगवान शुकदेव प्रकट हुए और उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराकर परम गति प्रदान की। कथा के दौरान संगीत कलाकारों द्वारा भगवान गणेश एवं हनुमान जी की सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।


























